Friday, 11 July 2008

जीवन सार

जो मरता है वो जीता है,
जो सोता है वो उठता है,
जो रोता है वो हँसता है,
जो खोता है वो पाता है,
रात है तो तो सवेरा है,
प्यास है तो तृप्ति है,
तृप्ति है तो संतुष्टि है,
संतुष्टि है तो सुख भी है,
सुख है तो दुःख भी है,
दुःख के बाद भी सुख ही है,
जीवन सुख दुःख का संगम है,
ये मेरे हृदयंगम है,
नैया है तो खेवैया है,
गाड़ी है तो पहिया है,
सुख दुःख के पतवार से ही चलती अपनी नईया है।