Friday, 11 July 2008

हमारी हिन्दी

सबसे पहले मुझे मन्दिर जाना है। वहां कुछ दीप जला कर मन के अंधेरे को दूर भगाना है। हिन्दी का विस्तार कर उसे अंतर्राष्ट्रीय बनाना है। हिन्दी शिक्षा, हिंदू शिक्षा का अर्थ समझाना है। कई बार प्रयास हुए, कई बार आवाज़ उठी। अब उसे बुलंद बनाना है। भारत को विश्व गुरु का दर्जा दिलाना है।

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