कुछ कर दिखाने का मन में आता है , कुछ to दिल men है jo मुझको भाताहै .
बहुत किया दूसरों का आसरा अब अपनी तक़दीर बदलने ki ठानी है मैंने,
दुनिया मेरी सबको भली लगे, जो आए सुखमय हो कर जिए।
जीवन को यज्ञमय बनाना है अपने गुरु का कर्जचुकाना है ।
बहुत लिया अब देने की बार आई, ये सबको समझाना है।
दिल का हर कोना भींग जाए कुछ ऐसे गुरुत्व में सामना है।
Friday, 30 January 2009
Thursday, 29 January 2009
दुःख के साथी!
भगवान कहते होंगे , दुःख के सब साथी सुख मे न कोई!
दुःख ही मनुष्य को भगवान के करीब ले जाता है, क्यूंकि तभी हम सच्चे दिल से उन्हें पुकारते है ।
दुःख हमें महान बनाता है , हमें दैवीय सत्ता का एहसास दिलाता है ।
जीवन में आगे बढना सिखाता है, अपने अस्तित्व का भान करता है।
अहं ब्रह्मास्मि का भाव जगाता है। दुःख हमें दुखी नही सुखी बनाता है, क्यूंकि ये जीने का ढंग सिखाता है।
हमारे के कल को उज्जवल कर, आज को ओज और तेज से भर जाता है।
दुःख हमें सुख का मतलब बताता है, हर पल को हंस कर जीने का संदेश पहुचता है.
दुःख ही मनुष्य को भगवान के करीब ले जाता है, क्यूंकि तभी हम सच्चे दिल से उन्हें पुकारते है ।
दुःख हमें महान बनाता है , हमें दैवीय सत्ता का एहसास दिलाता है ।
जीवन में आगे बढना सिखाता है, अपने अस्तित्व का भान करता है।
अहं ब्रह्मास्मि का भाव जगाता है। दुःख हमें दुखी नही सुखी बनाता है, क्यूंकि ये जीने का ढंग सिखाता है।
हमारे के कल को उज्जवल कर, आज को ओज और तेज से भर जाता है।
दुःख हमें सुख का मतलब बताता है, हर पल को हंस कर जीने का संदेश पहुचता है.
अच्छाई का सिला!
सबसे अच्छाई बांटकर क्यों बुरा मिला।
सभी को ये बुरा लगा , किसी को न अच्छा लगा।
समेट ले ख़ुद को एक हद में है अच्छा भला ।
अच्छाई का परचम क्यों लहरा दिया?
ख़ुद को तू खुदा बना, दुनिया का हो भला,
किंतु किसी को न हो ख़बर, ऐसी तू जुगत लगा;
यही सच्ची साधना, साधन भरा पड़ा ।
सभी को ये बुरा लगा , किसी को न अच्छा लगा।
समेट ले ख़ुद को एक हद में है अच्छा भला ।
अच्छाई का परचम क्यों लहरा दिया?
ख़ुद को तू खुदा बना, दुनिया का हो भला,
किंतु किसी को न हो ख़बर, ऐसी तू जुगत लगा;
यही सच्ची साधना, साधन भरा पड़ा ।
Tuesday, 27 January 2009
मेरी मंजिल !
कभी कभी ऐसा लगता है जैसे कुछ तो है जो मुझे रोक रहा है मंजिल की ओर जाने से और दुसरे पल लगता है मंजिल मेरे और पास है । हर पल me कुछ khas है जो मंजिल मेरे पास है , मेरी जिंदगी लेखन के लिए ही बनी है यकीनन । दुनिया की चकाचौंध में खोकर मै कुछ नही कर पाती , घर की चाहरदीवारी में मैंने दुनिया समेट ली है । पुरी दुनिया मेरी है और मै सबकी , ये भान मुझे मंजिल ले मिलाये। यही मेरी मनोकामना है , तथास्तु!
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