सबसे अच्छाई बांटकर क्यों बुरा मिला।
सभी को ये बुरा लगा , किसी को न अच्छा लगा।
समेट ले ख़ुद को एक हद में है अच्छा भला ।
अच्छाई का परचम क्यों लहरा दिया?
ख़ुद को तू खुदा बना, दुनिया का हो भला,
किंतु किसी को न हो ख़बर, ऐसी तू जुगत लगा;
यही सच्ची साधना, साधन भरा पड़ा ।
Thursday, 29 January 2009
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