Friday, 11 July 2008

मत भूलो तुम कौन हो

जब कोई अपने देश से आता है, तो वो वहां की ताजगी, सादगी साथ लाता है।
दिल उसका साफ नजर आता है। आँखों में चमक और खुशी का इझ्हार हमें खूब लुभाता है।
वो चमक न जाने कब, कैसे खो जाता है और सब कुछ वापस जैसा था वैसा ही हो जाता है।
क्यूँ ताजगी खो जाती है? जिंदगी बासी हो जाती है। क्यूँ सादगी पर दूसरा रंग चढ़ जाता है?
क्यूँ इंसान इतना मतलबी हो जाता है?
जिंदगी के मायने बदलते हैं, सपने खो जाते हैं, हम किसी और दुनिया के हो जाते हैं।
क्यूँ इंसान इंसानियत को भूल जाता है? दूसरों के दुःख को अपना नही समझ पाता है।
क्यूँ दूसरों की नक़ल में अपना सर्वस्व गंवाता है, बाद में वो रंगा सियार कहलाता है।
अपने अस्तित्व को बदलना बेईमानी है सबको पता है किसमे कितना पानी है।

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