कुछ कर दिखाने का मन में आता है , कुछ to दिल men है jo मुझको भाताहै .
बहुत किया दूसरों का आसरा अब अपनी तक़दीर बदलने ki ठानी है मैंने,
दुनिया मेरी सबको भली लगे, जो आए सुखमय हो कर जिए।
जीवन को यज्ञमय बनाना है अपने गुरु का कर्जचुकाना है ।
बहुत लिया अब देने की बार आई, ये सबको समझाना है।
दिल का हर कोना भींग जाए कुछ ऐसे गुरुत्व में सामना है।
Friday, 30 January 2009
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1 comment:
रसात्मक और सुंदर अभिव्यक्ति
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