Saturday, 27 March 2010

क्यूँ मिलाया उससे मुझे?

क्यूँ मिलाया उससे मुझे, जिससे मेरा रिश्ता नहीं।
जो मेरे जज्बात को थोडा भी समझता है नहीं।
सालों से सोचती रही, कोई तो मिलगा कही, जो समझेगा बात मेरी।
पर ये अभी तक हुआ है नहीं, न है अब मुझको यकीं।
मुझे स्वयं मै मिला लो अब तुम्ही, तुमसे अच्छा कोई नहीं।
धुंध बहुत, पाया नहीं।
मानती हूँ हार मैं, दुरीं सही जाती नहीं।

1 comment:

Peeyush..... said...

धुंध बहुत, पाया नहीं।.....

iska kya matlab hua ...?
baaki lines kaafi acchi lagi...!!

but why dont u put it in poetic format.? it will decorate it ..