Tuesday, 3 February 2009

दुःख की महिमा

दुःख हमें महान बनाता है , कष्ट हमें इन्सान बनाता है।
दुःख से घबराना ठीक नही , दुखों पर विजय ही सफलता का सोपान बन जाता है।
दुःख को जीतकर ही सुख पाता है , दुःख से लड़कर ही विजयी कहलाता है।
विजय मंत्र है ये , दुःख से भागो नहीउसे यूँ दिल में बसो;
दुःख को सुख में बदलकर सुख के अधिकारी बन जाओ।

9 comments:

Amit K Sagar said...

Very Nice.

Dr. Ashok Kumar Mishra said...

अच्छा लिखा है आपने । भाव, विचार, भाषा और प्रखर अभिव्यक्ति के कारण आपका शब्द संसार विशेष प्रभाव छोड़ने में समथॆ है ।

मैने अपने ब्लाग पर एक लेख लिखा है-आत्मविश्वास के सहारे जीतें जिंदगी की जंग-समय हो तो पढें और कमेंट भी दें-

http://www.ashokvichar.blogspot.com

अभिषेक मिश्र said...

Acchi shuruaat. swagat.

Office said...

उत्तम! ब्लाग जगत में पूरे उत्साह के साथ आपका स्वागत है। आपके शब्दों का सागर हमें हमेशा जोड़े रखेगा। कहते हैं, दो लोगों की मुलाकात बेवजह नहीं होती। मुलाकात आपकी और हमारी। मुलाकात यहां ब्लॉगर्स की। मुलाकात विचारों की, सब जुड़े हुए हैं।
नियमित लिखें। बेहतर लिखें। हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं। मिलते रहेंगे।
आपका
प्रवीण जाखड़

Anonymous said...

ब्लाग की दुनिया में आपका स्वागत है।
बहुत अच्छी कविता है।

Dr. Virendra Singh Yadav said...

blog ki is jadoogary nagari me apka swagat hai

गोविंद गोयल, श्रीगंगानगर said...

rahi manva dhukh ki chinta kyu satati hai dukh to apna sathi hai. narayan narayan

Anonymous said...

Your most welcome in blog world.

-------------------------"VISHAL"

Unknown said...

achha vichar.......kuch alag laga...likhte raho...

Jai Ho Mangalmay Ho